🙏अपने कुलगुरु के नाम एक खुला खत🙏


संदर्भ: "समुचित शिक्षा के बिना हो रही नियमित परीक्षा" एक महीने तक चली सेमेस्टर परीक्षा के बाद विद्यार्थी क्लास में आने लगे थे,तब स्कूटी के काम में अतिव्यस्त होने के कारण शिक्षक क्लास नहीं ले पा रहे थे। अब विश्वविद्यालय की परीक्षा हेतु अभी एक माह तक 10 मार्च से 8 अप्रैल तक शिक्षक क्लास नहीं ले पाएंगे। विद्यार्थियों में और शिक्षकों में भारी असंतोष है कि हमें पढ़ने-पढ़ाने जैसे अनिवार्य काम से दूर किया जा रहा है। क्या विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम पूर्ण कराना हम सबकी सामूहिक जिम्मेवारी नहीं है? कृपया मार्गदर्शन दें!


हे कुलगुरु!


वागड़ अंचल में जिले का सबसे बड़ा और पुराना कन्या महाविद्यालय जो बाजार के बीच जेल की दीवारों के भीतर चल रहा है, अपनी एक विशेष पहचान रखता है। यहां छात्राओं के लिए खेलने को थोड़ा भी स्थान नहीं है लेकिन पढ़ने के लिए क्लासरूम है। अगल-बगल के अन्य महाविद्यालयों की तुलना में यहां पर नियमित चलने वाली क्लासेज ने सबका ध्यान आकर्षित किया है जिसका अनुभव पाकर मेरे हृदय के भाव इन शब्दों में प्रकट हुए-


'जहां कभी जेल की दीवारें थीं


वहां आज चिड़ियां चहचहाती हैं


रोज नए-नए गीत गाती हैं


और अपने सपनों को सजाती हैं।'


                इसका प्रमाण यह है कि अन्य संसाधनों की भारी कमी के बावजूद योग्य और समर्पित शिक्षकों के कारण यूजीसी द्वारा इस संस्था को 'बी' ग्रेड प्रदान किया गया। यहां से गृहविज्ञान (पीजी) के विद्यार्थियों द्वारा  7 वर्षों से नियमित गोल्डमेडल प्राप्त किया जा रहा है। क्लास में विषय ज्ञान देने के बाद विद्यार्थियों के लिए नए-नए विषयों पर नियमित संवाद लिखने वाले शिक्षकों के कारण समाज के अन्य विद्यार्थी भी लाभान्वित हो रहे हैं। ऐसे में 10 मार्च से 6 अप्रैल2026 के बीच यहां विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रारंभ हो गई है जिसके कारण क्लास चलना संभव नहीं है।


             राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफल बनाने के लिए जीजीटीयू, आयुक्तालय और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में आपने दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित कराया जिसका लाभ हम सबको विशेष रूप से मिला। भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए कार्यशाला में मंच से बार-बार माननीय शिक्षाविदों द्वारा आह्वान किया गया और आपके द्वारा विशेष रूप से इस संकल्प की घोषणा की गई कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को हर कीमत पर हम सफलतापूर्वक लागू करके रहेंगे।


              राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह प्रावधान भी है कि गैर शैक्षिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त कर अध्ययन-अध्यापन में प्रमुख रूप से नियोजित किया जाएगा। शिक्षण और शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जो आपके द्वारा कार्यशाला में  व्याख्यान दिया गया था,उससे मैं बहुत प्रभावित हुआ था। विश्व की किसी अन्य संस्कृति में 'गुरु' जैसा महिमावान शब्द नहीं है और आप तो कुलगुरु हैं-


'भारत की पावन वसुधा पर गुरुपद पूजित और महान


वेदों में भी किया गया इस पावन पद का बड़ा बखान


देवों से भी पहले जिसका नाम उच्चारा जाता है


जो सच्चा पथ दर्शन देकर मंजिल तक पहुंचाता है।'


               आज आपके सच्चे पथ दर्शन की हम सभी को जरूरत है। नए पाठ्यक्रम के कारण और सेमेस्टर परीक्षा प्रणाली के कारण विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों को अतिरिक्त क्लासेज लेने की आवश्यकता महसूस हो रही है। लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ अपने कॉलेज की परीक्षाओं में लगने के कारण शिक्षण कार्य अत्यंत प्रभावित हुआ है। एक महीने तक जनवरी माह में सेमेस्टर परीक्षाओं के आयोजन में कॉलेज व्यस्त रहा। इसके बाद पढ़ाई शुरू ही हुई थी कि फिर से एक महीने का परीक्षा का कार्यक्रम थोप दिया गया जिसमें इस महाविद्यालय के परीक्षार्थी नहीं है।


         जो विद्यार्थी क्लास के लिए आ रहे हैं,वे अब पूछ रहे हैं कि पहले हमें विषय की समुचित शिक्षा दी जाए तब परीक्षा ली जाए। हम सभी जानते हैं कि न्यूनतम क्लास का जो प्रावधान है,वह भी पूरा नहीं किया जा रहा है। परीक्षा के कार्य में शिक्षकों का पूर्ण सहयोग है किंतु प्राथमिकता क्लास को दी जानी चाहिए या परीक्षा को;यह सबसे बड़ा प्रश्न इस समय उपस्थित है।


               भारतीय ज्ञान परंपरा का विशेष केंद्र महाविद्यालय में चल रहा है, नई किरण नशा मुक्त भारत के विशेष अभियान को सफल बनाने में शिक्षक लगे हुए हैं और उच्चतम न्यायालय द्वारा विद्यार्थियों में बढ़ रहे अवसाद और आत्महत्या को रोकने के लिए शिक्षकों को विशेष भूमिका निभाने का निर्देश आ रहा है। स्कूटी वितरण का नोडल होने के कारण पहले से ही यह महाविद्यालय अतिरिक्त बोझ तले दबा जा रहा था; ऐसे में  सभी विषयों की अनिवार्य क्लासेज भी जब परीक्षा के नाम पर बाधित कर दी जाएगी तब पाठ्यक्रम कहां से पूर्ण होगा?


            क्या आदिवासी अंचल का विश्वविद्यालय जीजीटीयू सिर्फ डिग्री बांटने का केंद्र बनकर रह जाएगा या प्रतिभा निखार का केंद्र बनने की ओर भी अग्रसर होगा? यदि प्रतिभा निखार का केंद्र बनाना है तो क्लास की गौरव-गरिमा बढ़ानी होगी। पढ़नेवाले और पढ़ानेवाले के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनानी होगी। शिक्षकों को राष्ट्रनिर्माता कहा जाता है और राष्ट्रनिर्माण क्लास में होता है। इस बात को कुलगुरु से ज्यादा अच्छी प्रकार कौन समझ सकता है? नए नियुक्त हुए सभी सहायक आचार्य अपने विषय ज्ञान की प्रतिभा को क्लास में विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए उत्सुक हैं किंतु उनकी शिकायत है कि क्लास यहां पर सबसे उपेक्षित हैं, हम लोगों को सिर्फ सूचना जुटाने और भेजने का आदेश प्राचार्य द्वारा प्रमुखता से दिया जाता है। जब विद्यार्थी नशे की ओर जा रहे हैं, अवसाद और आत्महत्या की ओर कदम बढ़ा रहे हैं; उसे रोकने का सबसे प्रभावी उपाय क्लास से बेहतर दूसरा क्या हो सकता है?


               गुरुओं ने भारतीय संस्कृति में मार्गदर्शन सदैव किया है, खासकर कुलगुरुओं ने तो अहंकारी राजाओं को भी आत्मज्ञान प्रदान कर श्रेयमार्ग पर लगाया है। आपसे इतना ही अनुरोध है कि जब युवा पीढ़ी भटक रही हो तो उसको रास्ता दिखाने वाले शिक्षकों के क्लास की ओर लौटाइए-


'साहिले मकसूद पर ले चल खुदारा नाखुदा


आज हिंदुस्तान की कश्ती बड़ी मुश्किल में है।'


डॉ.सर्वजीत दुबे, आचार्य संस्कृत,HDJGGC🙏