आम आदमी और मूल्यबोध
May 1, 2026/start
🙏'इंडिया अगेंस्ट करप्शन'आंदोलन से जन्मी आम आदमी पार्टी जब मूल्यों की कसौटी पर परखी जा रही हो तो आम आदमी और मूल्यबोध पर एक दार्शनिक दृष्टि🙏
संवाद
"आम आदमी और मूल्यबोध"
मूल्यबोध मानव को सभी जीवों में सर्वश्रेष्ठ बनाता है। महाभारतकार ने इसी को आधार बनाकर कहा होगा कि मनुष्य से श्रेष्ठ और कुछ नहीं है-'न हि मानुषात् श्रेष्ठतरम् हि किंचित्।' जीवों के लिए सबसे ज्यादा प्रिय उसका प्राण होता है किंतु मानव ऐसा जीव है जो कुछ मूल्यों के लिए अपने प्राणों की भी बलि देने को तैयार हो जाता है।
एक जानवर कामभावना के वशीभूत होकर दूसरे जानवर के साथ संबंध बना लेता है और एक जानवर भूख के कारण दूसरे जानवर को मार कर खा जाता है तो कभी भी उस जानवर से प्रश्न नहीं पूछा जाता है; क्योंकि वह प्रकृति के अधीन है।
प्रकृति के ऊपर उठने की सामर्थ्य मानव में है इसलिए संस्कृति विकसित हुई। इसके साथ मानव में प्रकृति से नीचे गिरने की भी संभावना है इसलिए विकृति भी आई। दूसरे शब्दों में कहें तो पशु सिर्फ प्रकृति में जीता है किंतु मानव संस्कृति में भी जीता है और विकृति में भी। मानव में एक संभावना गांधी की भी है तो दूसरी संभावना हिटलर की भी है।
'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' के आंदोलन में जो आम आदमी समर्थन में उठ खड़ा हुआ,उसके पीछे मूल कारण मूल्यबोध था। हर आदमी के अंतर में एक आत्मा है जो मूल्यपरक जीवन को सबसे ज्यादा महत्व देती है। उन मूल्यों के प्रतीक अन्ना और अरविंद केजरीवाल रातों-रात नायक बन गए।
जब अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाई तो उनको अपार जनसमर्थन मिला। लेकिन ज्यों ही एक आंदोलन से निकले लोगों का समूह एक राजनीतिक पार्टी के रूप में अस्तित्व में आया तो उसके समक्ष उन मूल्यों को राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में उतारने की चुनौती भी शुरू हुई। चूंकि ऊंचा मापदंड आपने ही निर्धारित किया था इसलिए उसी आदर्श मापदंड पर आपकी परीक्षा होगी।
व्यक्तिगत जीवन की साधना के ऊंचे आदर्श सत्य,प्रेम,अहिंसा को गांधी ने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में उतारने की घोषणा की। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को उस आधार पर चलाने का प्रयास किया। जिन मूल्यों की गांधी ने बात की,अपने मन-वचन- कर्म से उन मूल्यों को जी कर उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रेरित किया। चौरीचौरा कांड में हिंसा हुई और गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया। वे जीवन भर उन मूल्यों पर चलने का एक ईमानदार प्रयास करते रहे जिसने उन्हें रवींद्रनाथ टैगोर की नजर में महात्मा बना दिया और सुभाषचंद्र बोस की नजर में राष्ट्रपिता। यहां तक कि अपने मूल्यों के लिए उन्हें अपने प्राणों की बलि देनी पड़ी।
अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और उनको अपने साथियों सहित जेल भी जाना पड़ा किंतु वे मूल्यों की दुहाई देते रहे। लेकिन जब उनके सात राज्यसभा सांसद मूल्यों को छोड़ने का आरोप लगाकर आम आदमी पार्टी छोड़ जाएं तो फिर मूल्यबोध पर गंभीरता से विचार करना होगा।
सार्वजनिक जीवन में और खासकर राजनीतिक जीवन में मूल्यविहीनता राष्ट्र के सामने आज सबसे बड़ा संकट है। राजतंत्र के जमाने की 'यथा राजा,तथा प्रजा' की उक्ति आज लोकतंत्र में भी समीचीन है क्योंकि अनुयायी अपने नेता से अनुप्राणित होते हैं। लेकिन जब देखा जा रहा है कि अधिकतर नेताओं पर लगे गंभीर किस्म के आरोपों में सच्चाई है तो लोगों के जीवन में ऊंचे मूल्यों के लिए जीने की प्रेरणा नहीं मिलती है। संसद में 'कैश फॉर वोट' कांड हुआ था, उससे संसद की जमीर हिल गई थी। लेकिन उसी संसद में जब भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई जी की सरकार एक वोट से गिर गई तब यह संदेश गया कि इस देश में ऐसी भी एक ईमानदार सरकार और ईमानदार नेता है जो अपनी सत्ता बचाने के लिए एक वोट भी मैनेज नहीं करता।
'जहां कहीं है ज्योति जगत में,जहां कहीं उजियाला
वहां खड़ा है कोई अंतिम मोल चुकाने वाला।'
जहां कहीं भी आत्मा की ज्योति जलती रहती है, वहां उस उजियारे में मूल्यविहीनता रूपी अंधकार टिक नहीं पाता। जरूरत है आज उस अंतरात्मा की ज्योति जलाने की जिससे सार्वजनिक जीवन में और खासकर राजनीतिक जीवन में मूल्यबोध बढ़े अन्यथा राष्ट्र एक गहरे गर्त में गिर जाएगा।
'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹