लाक्षागृह में जलते लोग
June 25, 2026🙏स्वार्थ और लोभ के लाख से बने आज के लाक्षागृह शकुनि और दुर्योधन के द्वारा बनाए गए लाक्षागृह से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं-एक दृष्टि🔥
संवाद
'लाक्षागृह में जलते लोग'
लखनऊ के लाक्षागृह में जल चुके 15 युवाओं के सुंदर चेहरे को देखकर मन में एक प्रश्न उठ रहा था कि हे अग्नि देव! यदि होलिका की आग में जलने से प्रहलाद बच सकते हैं तो इन चेहरों को क्यों नहीं बचा लिया। ये सभी किसी के घर के चिराग थे, किन्ही आंखों के नूर थे और परमात्मा की ही सौंदर्यपूर्ण कृति थे। किंतु अग्नि बहुत साम्यवादी है, यह किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करती, चाहे वह सुंदर हो या असुंदर, जड़ हो या चेतन।
महाभारत काल में शकुनि और दुर्योधन ने मिलकर पांडवों को जलाने के उद्देश्य से लाक्षागृह बनवाया था। लोभ,ईर्ष्या और अहंकार के बल पर तैयार किया गया वह लाक्षागृह विदुर नीति के कारण अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सका और पांडव बच गए किंतु आज का लाक्षागृह नैतिकता के अभाव में लगातार जीवन के सारे सुनहरे सपनों को क्षण भर में खाक कर रहा है।
सरकार बोलती है कि दोषी बच नहीं पाएंगे किंतु जब दोष पूरा सिस्टम का हो तो किसको सजा दी जाए। अवैध निर्माण,अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी, पर्यावरणीय स्वीकृतियों की उपेक्षा इत्यादि अनेक कारक मिलकर आधुनिक लाक्षागृहों को जन्म दे रहे हैं।
लोग अपने घरों में भी महफूज नहीं है। पेड़ों को काटकर हमने कंक्रीट के भवन खड़े कर लिए और बढ़ती गर्मी से बचने के लिए हर घर में ए.सी. लगा लिए। किंतु कभी यह नहीं सोचा कि प्रकृति के साथ किया गया अनाचार एक दिन हमारे घर को भी लाक्षागृह में तब्दील कर देगा। ठंडा करने वाला ए.सी. ही जलकर अपनी आग में हमें जला देगा। अब तो धरती का तापमान इतना बढ़ गया है कि पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयास नहीं किया गया तो यह धरती रूपी घोंसला ही इस आग की भेंट चढ़ जाएगा।
वस्तुत:लाक्षागृह जीवन का एक रूपक है। हम सभी के अंदर में बैठा हुआ शकुनि और दुर्योधन स्वार्थ,लोभ और अनैतिकता की लाख से लाक्षागृह बनवाता है। जब समाज,बिल्डर और प्रशासन प्रकृति का विनाश करके सिर्फ व्यावसायिक दृष्टिकोण से जीवन को देखेंगे तो लाक्षागृह बनते रहेंगे और उसमें लोग जलते रहेंगे।
भारतीय ज्ञान परंपरा की दृष्टि कहती है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके विकास की विवेकपूर्ण समग्र दृष्टि विकसित की जाए जिसमें सभी प्राणियों के लिए सुरक्षा और सम्मान हो।
'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹