शिक्षा की दशा,स्वतंत्रता की दिशा
August 14, 2026/start
🙏स्वतंत्रता दिवस की शुभकामना🙏
शिक्षा की दशा तय करती है कि स्वतंत्रता की दिशा क्या होगी। स्वतंत्रता की दिशा यदि सही होती तो जागरूक और उत्तरदायित्वपूर्ण देश होता-एक दृष्टि🔥
संवाद
'शिक्षा की दशा,स्वतंत्रता की दिशा'
स्वतंत्रता की कीमत चुकानी पड़ती है। ब्रिटिश राज से स्वतंत्र होने के लिए हमारे पूर्वजों ने वह कीमत चुकाई। अपना सर्वस्व देश के लिए अर्पित कर दिया। किंतु उस स्वतंत्रता को बचाए रखने के लिए और बढ़ाते रहने के लिए जो कीमत हमें चुकानी थी, वह कीमत हमने नहीं चुकाई। अतः भारत की स्वतंत्रता गहरे खतरे में है।
जागरूकता और उत्तरदायित्व रूपी दो पंखों के सहारे स्वतंत्रता के आकाश में उड़ा जा सकता है; किंतु हम बहुत सोए हुए लोग निकले। जिस देश ने प्रश्नोपनिषद पैदा किया था, वहां के लोग प्रश्न उठाने की कला ही भूल गए। जहां की धरती पर 'कर्मण्येवाधिकारस्ते' का मंत्र देकर उत्तरदायित्व को सबसे महत्वपूर्ण माना गया था,वहां पर लोग सबसे ज्यादा उत्तरदायित्वहीन निकले। जिन्हें राह दिखाना था,वे राह भटकाने लगे। नेता सदन में चर्चा नहीं करते हैं, जनता योग्यता देखकर वोट नहीं देती है, पुलिस हमारी रक्षा नहीं करती है, प्रशासक लोक सेवक से लोक स्वामी बन गए हैं, पेपर सेटर शिक्षक ही पेपर बेचने लगे हैं, विद्यार्थी प्रश्नपत्र पाने के लिए किसी भी हद तक जाने लगे हैं, पत्रकार चाटुकार बन गए हैं...... ऐसे में एक ही प्रश्न दिलोदिमाग में गूंजता रहता है -"क्या यही है स्वतंत्रता?"-
"नेता स्वतंत्र है बिना चर्चा के वेतन भत्ते उठाने को
किसी बहाने से सदन को रोज स्थगित कराने को।
जनता स्वतंत्र है प्रलोभनों पर अपना वोट गिराने को
भ्रष्टाचारी तभी जीतते हैं सदन की शोभा बढ़ाने को।
पुलिस स्वतंत्र है नीरो की तरह चैन की वंशी बजाने को
पैलेट गन से अपने ही नौजवानों को अंधा बनाने को।
प्रशासक स्वतंत्र है लोकसेवक से लोकस्वामी बन जाने को
हरे नोट के ही दबाव में कुछ फाइलें जल्दी निपटाने को।
शिक्षक स्वतंत्र है क्लास छोड़कर कोचिंग में पढ़ाने को
सरस्वती को सौत बनाकर लक्ष्मी को गले लगाने को।
विद्यार्थी स्वतंत्र है बिना पढ़े नौकरी का जुगाड़ बिठाने को
विद्या की अर्थी निकाल परीक्षा-पूर्व पेपर पा जाने को।
पत्रकार स्वतंत्र है कथनी लेखनी से सनसनी फैलाने को
कामुक हिंसक खबरें देकर विज्ञापनों से मनी बनाने को।
ऐसी स्वतंत्रता से हम दो चार ही पंद्रह अगस्त मना पाएंगे
फिर किसी विदेशी ताकत के पैरों तले कुचले जाएंगे।"
शिक्षा की जितनी गहरी और व्यापक दृष्टि भारतीय संस्कृति की थी, उतनी गहराई और व्यापकता अन्य संस्कृतियों की शिक्षा दृष्टि में दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि स्वतंत्रता से भी ज्यादा हमने मोक्ष को महत्व दिया क्योंकि स्वतंत्रता में बाहरी बंधनों से मुक्ति को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है जबकि मोक्ष में बाहरी बंधनों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण आंतरिक अज्ञान के बंधन से मुक्ति पाना है।
आज शिक्षा की दशा और दिशा के गलत हो जाने के कारण एक तरफ पेपर लीक हो रहा है तो दूसरी तरफ विद्यार्थी अवसाद में जा रहे हैं और आत्महत्या तक कर रहे हैं। यदि हमने स्वतंत्रता का सदुपयोग किया होता तो शिक्षा हमारी सबसे पहली प्राथमिकता होती और हमारी शिक्षा से जागरूक और उत्तरदायित्वपूर्ण नागरिक तैयार होते।
ऐसा नहीं है कि कुछ क्षेत्रों में कुछ लोगों ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल नहीं की है किंतु भारत जैसे विशाल और विविधता से पूर्ण देश के लिए जब तक सभी को जागरूक और उत्तरदायित्वपूर्ण बनाने वाली शिक्षा व्यवस्था तैयार नहीं की जाती तब तक स्वतंत्रता का यज्ञ पूर्ण नहीं हो सकता।
'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹