सद्भावना का शक्ति
August 20, 2026/start
🙏सद्भावना दिवस की शुभकामना🙏
दुर्भावना के कारण नरक बनते जा रहे जगत को सद्भावना के द्वारा ही स्वर्ग बनाया जा सकता है-एक दृष्टि🔥
संवाद
"सद्भावना का शक्ति"
20 अगस्त को 'सद्भावना दिवस' के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री स्व.श्री राजीव गांधी के जन्मदिवस को मनाया जाता है। सद्भावना के महत्व को नहीं समझने के कारण जीवन तनाव से अत्यंत भर गया है। जीवन के प्रति दो प्रकार की दृष्टि हो सकती है। एक है सद्भावना की मित्रवत् दृष्टि और दूसरी है दुर्भावना की अरिवत् दृष्टि। सद्भावना की मित्रवत् दृष्टि वाले व्यक्ति के लिए संसार प्रेम से पूर्ण हो जाता है जबकि दुर्भावना की अरिवत् दृष्टि वाले व्यक्ति के लिए संसार घृणा से भर जाता है।
प्रेम तो कहीं जगत में दिखाई नहीं देता किंतु घृणा चारों तरफ दिखाई दे रही है। इसके परिणामस्वरूप अवसाद और आत्महत्या की घटना में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। संसद में पक्ष और विपक्ष के बीच जो दुर्भावना उत्पन्न हुई है,वह सड़क पर नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के बीच भी प्रकट हो रही है। हेट स्पीच से लेकर गाली देने वाले वीडियो यही बता रहे हैं कि सद्भावना के अभाव में यह जगत नरक बनता जा रहा है।
सद्भावना स्वयं के हृदय में जो शांति और शीतलता पैदा करती है,उसके कारण दूसरे का हृदय भी शांति और शीतलता से भर जाता है। तभी तो ऋषियों ने सभी के सुखी होने की भावना की-'सर्वे भवंतु सुखिन:'। इस सद्भावना में इतनी बड़ी शक्ति छुपी हुई है कि श्री राजीव गांधी की हत्या करने वाली नलिनी को गांधी परिवार ने क्षमा कर दिया। इस परिवार का ध्यान नलिनी की छोटी बेटी पर गया और उसके कारण प्रेम से पूर्ण हृदय ने 'माफ करो और भूल जाओ'(forgive and forget) का मंत्र अपनाया-
'दुनिया है तहलके में तो परवाह न कीजिए
यह दिल है रूहे अस्र का मस्कन बचाइए
दिल खो गया तो जानिए अंधेर हो गया
एक शमां आंधियों में है रोशन बचाइए।'
दिल आत्मा का मंदिर है, इसको सद्भाव से भरकर ही हम बचा सकते हैं। कवि कहता है कि यह दिल खो गया तो चारों तरफ अंधेरा हो जाएगा। आज तो दुर्भावना के कारण महापुरुषों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है और उनके बारे में आपत्तिजनक बातें कही जा रही हैं। किसी भी जाति,धर्म,क्षेत्र में जन्मा हुआ महापुरुष कई लोगों के प्रेरणा स्रोत होते हैं, उन्हीं पर जब हम कीचड़ उछालने लगते हैं तो हम ऊंचाइयों पर जाने की सीढ़ी को तोड़ देते हैं।
सद्भावना यदि बढ़ता है तो मानव हृदय में इतनी शक्ति है कि हत्या करने वालों को भी क्षमा किया जा सकता है और दुर्भावना यदि बढ़ता है तो महापुरुषों में भी दुर्गुण ढूंढा जा सकता है। कुछ नेता और महापुरुष ऐसे होते हैं जिनको विरोधी भी पसंद करते हैं। स्व.श्री राजीव गांधी और स्व.श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी इसकी मिसाल है।
मानव व्यक्तित्व की सबसे गहरी परत भावना है। सद्भावना से सद्विचार उत्पन्न होते हैं और फिर सत्कर्म। अतः सद्भावना गंगोत्री है। यदि गंगोत्री गंदी हो गई तो गंगा साफ सुथरी कैसे रह सकती है? अतः सद्भावना की गंगोत्री को साफ और पवित्र रखना हम सभी का पुनीत कर्तव्य है।
🙏सादर श्रद्धांजलि 🙏
'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹