संभवामि युगे युगे
September 3, 2026🙏जन्माष्टमी की शुभकामना🙏
जब-जब धर्म की ग्लानि होती है तब तब कृष्ण चेतना किसी न किसी रूप में प्रकट होने लगती हैं-एक दृष्टि🔥
संवाद
"संभवामि युगे युगे"
कृष्ण चेतना अन्यायी सत्ता के प्रति विद्रोह से और प्रकृति के प्रति प्रेम से भरी हुई चेतना है। जब जब धर्म की ग्लानि होने लगती है तब तब कृष्ण चेतना उत्पन्न होने लगती हैं-
'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत...
आज हम चारों तरफ विद्रोही चेतनाएं देख रहे हैं। जेन जी से लेकर जेन अल्फा तक में विद्रोह की यह आग फैलती जा रही है। सत्ता के अन्याय के प्रति भय से जब लोग डरे सहमे हुए थे, उस समय बाल कृष्ण ने गोकुल से मथुरा भेजी जाने वाली दही माखन आदि उपहारों को राजा कंस तक पहुंचने से रोक दिया और लोगों को अपने हक के लिए आवाज को बुलंद करना सिखाया। आज जब जगह-जगह शिक्षा के हक के लिए आवाज उठाई जा रही है तथा अन्याय के विरुद्ध खड़ा होने का साहस दिखाया जा रहा है तो उसमें कृष्ण चेतना की झलक देखने को मिल रही है। अन्यथा बिहार का आदित्य जैसा छोटा बच्चा सत्ता के विरोध में खड़े होने का और सवाल पूछने का इतना बड़ा साहस नहीं कर पाता। अपने पिता से सवाल पूछ कर मृत्यु के देवता यमराज तक जाने वाले नचिकेता के देश में कृष्ण चेतना का जन्म होना कोई आश्चर्य की बात नहीं। आज वही चेतना जगह-जगह छोटे और बड़े रूप में प्रकट होती दिखाई दे रही है।
तथाकथित विकास के नाम पर पूंजीपतियों द्वारा जो प्रकृति का विनाश किया जा रहा है और जिसके फलस्वरूप नेपाल जैसी त्रासदी घटित हो रही है उसके विरोध में भी खड़े होने की प्रेरणा कृष्ण चेतना से मिलती है। उनके जीवन का कालियानाग दमन प्रसंग और गोवर्धन की पूजा का प्रसंग यही बताता है कि प्रकृति में ही परमात्मा बसते हैं। यमुना को प्रदूषित करने वाले कालिया नाग का जिस प्रकार से उन्होंने दमन किया और गोकुलवासियों की रक्षा करने वाले गोवर्धन पर्वत की पूजा का जिस प्रकार से उन्होंने श्रीगणेश कराया, उसके निहितार्थ आज के लिए बहुत उपयोगी हैं। आज नदियों में औद्योगिक अपशिष्ट,प्लास्टिक और गंदा पानी प्रवाहित किया जा रहा है और पर्वतों को काटकर पर्यटन के लिए रास्ता बनाया जा रहा है; ऐसे में जरूरत है कि कृष्ण चेतना से प्रेरित होकर पर्यावरण प्रदूषण के विरोध में नई चेतनाएं खड़ी हों। प्रकृति पूजक कृष्ण का जीवन यही संदेश दे रहा है कि वस्तुओं का उपभोग नहीं उपयोग करना चाहिए और प्रकृति पर विजय नहीं बल्कि उनके साथ जीवन का योग होना चाहिए।
'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹