गुड़िया शक्ति भी,भार भी
September 26, 2026/start
🙏गुड़िया के साथ सड़क पर छेड़खानी की घटना बुद्ध की धरती को बुद्धुओं की धरती साबित करता है-एक विश्लेषण 😭
संवाद
"गुड़िया शक्ति भी,भार भी"
गौतम जब बुद्ध बन गए तो कल्याण मित्र के रूप में विहार करते हुए करुणा का संदेश जन जन तक पहुंचाते रहे, वह धरती आज बिहार कहलाती है। उस बिहार की धरती से मनचले गुड्डों द्वारा गुड़िया को छेड़ने की जिस प्रकार की घटना वायरल हुई है, उसे देखकर बुद्ध की धरती को बुद्धुओं की धरती कहना ज्यादा उचित होगा। बुद्धू का मतलब होता है जिस डाल पर बैठे हो उसी डाल को काटना। जिस सड़क पर बुद्धू छेड़खानी कर रहा है,उसी सड़क पर उसकी बहन को भी चलना है, यह वह सोच ही नहीं पाता। एक गुड़िया जब घर से बाहर निकलकर पढ़ती है तो कितनी बड़ी शक्ति बन जाती है, इसका उदाहरण मेरे पास है और जब किसी गुड़िया को छेड़खानी के डर से घर के बाहर निकलने से रोक दिया जाता है तो वह कितनी बड़ी भार बन जाती है, इसका भी अनुभव मेरे पास है।
एक गुड़िया की कहानी है जो चार भाई बहनों में सबसे बड़ी पैदा हुई। जिज्ञासा के कारण किताबों में उसका बहुत मन लगता। अपनी चाचाओं को पढ़ते देखकर उन्हीं के साथ पढ़ती और स्कूल में शिक्षकों से बहुत कुछ सीखती।शिक्षक होने के बावजूद भी पिता की सोच ऐसी थी कि गुड़िया को घर के काम पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। मां को भी चिंता रहती थी कि पढ़ाई के काम में ज्यादा मशगूल होने से घर के काम ठीक से नहीं कर पाएगी तो ससुराल जाकर क्या करेगी? लेकिन गुड़िया 10वीं बोर्ड में मेरिट में आ गई और चाचाओं की प्रेरणा से उसके पंख लग गए। उस गांव में कोई कॉलेज नहीं था और मां-बाप को बाहर भेजने की कोई इच्छा नहीं थी। गुड़िया को लगने लगा कि इस घर से बाहर निकले बिना उसकी जिंदगी नरक बन जाएगी। कहीं जाने पर छेड़खानी का सामना उसको भी करना पड़ता था किंतु छेड़खानी के डर से आसमान में उड़ने की तमन्ना छोड़ने को वह राजी नहीं थी। उसने जिद करके विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र जैसे विषय में दाखिला ले लिया। मां-बाप को चिंता रहती कि वह कहीं बिगड़ नहीं जाए और गुड़िया को चिंता रहती थी कि पढ़ाई के बिना मेरे भाई-बहन पिछड़ नहीं जाएं। वह स्वयं दिन-रात पढ़ती और भाई-बहनों को भी पढ़कर बाहर निकलने की प्रेरणा देती। गुड़िया एम.ए. में गोल्ड मेडलिस्ट हो गई। मां बाप को एक तरफ खुशी हुई किंतु दूसरी तरफ चिंता और ज्यादा गहरा गई कि इसकी शादी के लिए इतना योग्य लड़का कहां मिलेगा और दहेज के इतने पैसे कहां से आएंगे? गुड़िया के मन में पढ़ाई के अलावा शादी का कोई ख्याल ही नहीं था। अपने बहन और भाई को भी वह अपने पास लाई और उन्हें खुला आकाश दिखाया। पढ़ाई की जिद ने गुड़िया की ही नहीं, उसके भाई-बहनों की भी किस्मत बदल दी और सभी शिक्षा जगत में राजपत्रित अधिकारी बन गए। आज गुड़िया का स्थान उस घर में किसी देवी से कम नहीं है और गुड़िया के लिए पढ़ने की प्रेरणा देने वाले शिक्षक और चाचा लोग किसी देवता से कम नहीं है।
अब दूसरी गुड़िया की करूण कहानी सुनिए। छेड़खानी के डर से उसे स्कूल जाने से रोक दिया गया। तन तो बढ़ता गया किंतु मन छोटा होता गया। मन तो शिक्षा के कारण बड़ा होता है। शादी तो उसकी जल्दी करा दी गई किंतु शिक्षा के अभाव के कारण पढ़े लिखे ससुराल में उसे इतने ताने सुनने पड़ते और उसके घर वालों को इतने उलाहने झेलने पड़ते कि उसका जीना मुश्किल हो गया। अशिक्षित बहू का टॉर्चर बढ़ता गया और उसके मां-बाप से दहेज की मांग भी बढ़ती गई। क्लेश ने सबके जीवन को नर्क बना दिया था। पति ने धोखे से दूसरी शादी करके फिर से स्वर्ग की कामना की। गुड़िया ने जहर खा लिया। जहर खाने से वह मरी कि नहीं, यह बात उतना महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि शिक्षा के अभाव में वह तिल-तिल कर प्रतिदिन मर रही थी।
समाज को यह सोचना है कि शिक्षा के लिए गुड़िया को सुरक्षित सड़क उपलब्ध कराएं या नहीं?-
'लड़की ने देख रास्ते को दूसरी ओर मोड़ लिया,
लड़कों पर विश्वास न जाने क्यों छोड़ दिया?
दरख्तों से दूर चिड़ियों का निवास हो गया
व्यवस्था से क्यों हर शख्स का विश्वास खो गया?'
जो गुड़िया बाहर निकली और अपने भाइयों को पढ़ाया, उन भाइयों में इतनी संवेदनशीलता है कि किसी लड़की को छेड़ने की तो बात ही छोड़िए, उनके बारे में वे बुरा सोच भी नहीं सकते। लड़कियों के साथ वे ठीक उसी प्रकार से रहते हैं जिस प्रकार से अपनी गुड़िया दीदी के साथ। यदि शिक्षा के कारण इतनी संवेदनशीलता और संवादशीलता एक घर के गुड्डे गुडियों में आ सकती हैं तो दूसरे घर के गुड्डे गुडियों में क्यों नहीं आ सकती?
'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹