🙏क्रिकेट के सितारे विनोद कांबली को वृद्धाश्रम में देखकर सोच में पड़ गया कि इसे कर्मों का परिणाम माना जाए या नियति-एक विश्लेषण 😭


संवाद


"गर्दिश में तारे"


वृद्धाश्रम में विनोद कांबली को देखकर हृदय द्रवित हो उठा। भावातिरेक में आंखों के सामने में कई यादें घूमने लगीं। क्रिकेट के मैदान में बिताए गए 10 वर्षों के मेरे लंबे लम्हे और क्रिकेटरों के साथ तब से लेकर अब तक की बातें सब जीवंत हो उठीं। मुझे क्रिकेट से अलग होना पड़ा और पढ़ाई की राह पकड़नी पड़ी। लेकिन अब भी क्रिकेट की याद आते ही तरुणाई के दिन याद आने लगते हैं और पढ़ाई की याद आते ही तन्हाई की रातें गहराने लगती हैं। क्रिकेटर समूह में ही पैदा होता है और जीता है अतः उसका परिवार बहुत बड़ा होता है।


           कांबली की उम्र कोच के रूप में काम करने की उम्र है, वृद्धाश्रम में जाने की नहीं।चमन में कई फूल साथ-साथ खिलते हैं,किस्मत जुदा-जुदा होती है। सचिन और कांबली दोनों साथ-साथ खिले और खेले। दोनों की दोस्ती भी चर्चा का विषय रही। शुरू के बरसों में यह निर्णय करना मुश्किल था कि दोनों में से कौन बेहतर है? कांबली की बाएं हाथ का बल्लेबाज होने के साथ आक्रामक ढंग से लंबी पारी खेलने की क्षमता उन्हें विशिष्ट बनाती थी। किंतु एक तरफ सचिन अपने खेल को निखारते गए और कांबली अपनी एकाग्रता खोते गए। अपने फॉर्म को खो देने के साथ टीम से बाहर होने के कारण वे अपने रास्ते से और भटकते चले गए।


'फिसले जो उस जगह से लुढ़कते चले गए


उनको पता नहीं था कि इतना ढलान है


देखे हैं उसने दौर कई पर अब खबर नहीं


पांवों तले जमीन है या आसमान है।'


           आज एक ही माली (रमाकांत आचरेकर) के दो फूलों में जमीन आसमान का अंतर देखकर आश्चर्य होता है और अवसाद भी-


"दो फूल साथ-साथ खिले,किस्मत जुदा जुदा है


  नोशे के एक सर पर,एक कब्र पर चढ़ा है।


  दो भाइयों को देखो आपस में है हकीकी


  एक शाह दिलवर है,एक फिर रहा गदा है।।"


                बालों का पकना और उड़ना, अंगों का शिथिल होना वृद्धावस्था में आम बात है किंतु कांबली के कांपते हाथ और लड़खड़ाती जुबान के साथ चेहरे पर दीनता के भाव को देखकर मैं सोचने लगा कि यह साधना से विचलन का परिणाम है या नियति। रामायण में वाल्मीकि लिखते हैं कि नियति से ही सब कुछ होता है-


'नियति: कारणम् लोके, नियति: कर्मसाधनम्'.


सचिन की सेहत और कांबली की सेहत के अंतर को देखकर लगता है कि साधना से विचलन का यह परिणाम है।'योगभ्रष्ट' शब्द संस्कृत साहित्य का महत्वपूर्ण शब्द है। योगी जब ऊंचाइयों पर चढ़ता है तो वहां से गिरने की संभावना सदैव बनी रहती है। सावधानी हटी कि दुर्घटना घटी। कांबली की एकाग्रता एक समय योगियों के समान थी तभी तो उन्होंने टेस्ट क्रिकेट के शुरुआती दिनों में चार शतक में से दो दोहरे शतक लगाए। उस समय तेंदुलकर भी फीके पड़ गए थे। लेकिन बाद में तेंदुलकर का सितारा चमकता चला गया और कांबली का गर्दिश में गिरता चला गया।


ऐसे समय में आपके संगसाथ और परिवार की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उतार चढ़ाव तो जीवन का हिस्सा है किंतु बाहरी प्रदर्शन के साथ आंतरिक दर्शन यदि गहरा नहीं हो तो व्यक्ति जड़मूल से नष्ट हो जाता है।खिलाड़ियों की दुनिया जितनी चकाचौंध से भरी होती है, उतनी ही अनिश्चित भी होती है। लाखों की संख्या में प्रशंसक जो आपके लिए ताली बजा रहे होते हैं, वे ही आपके आउट ऑफ़ फॉर्म होने के बाद हूटिंग करने लगते हैं। ज्वार और भाटा के ऐसे समय में प्यार के रिश्ते ही आपका सहारा बनते हैं। लेकिन जब आप अपने को इंसान कम और स्टार ज्यादा समझने लगते हैं तो प्यार का वह नाजुक धागा टूट जाता है। आप तन्हा रह जाते हैं-


'भीड़ से जुदा एक फर्द क्यों है?


हरी शाखों का साया जर्द क्यों है?


ये मौसम इस कदर बेदर्द क्यों है?


किस्मत में आई ये गर्द क्यों है??


                 ऐसे में मानना पड़ता है कि जीवन एक रहस्य है जिसके कारण एक उपवन एक माली होने के बावजूद एक फूल के नसीब में भारत रत्न आया और दूसरे फूल के नसीब में वृद्धाश्रम।


'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹