वक्त और आस्था के धनी स्मित
October 9, 2026🙏साहस,संकल्प और संकटमोचक के प्रति समर्पण की त्रिवेणी "कैप्टन स्मित" ने अंधेरे में एक दीप जलाया है-एक दृष्टि🔥
संवाद
'वक्त और आस्था के धनी स्मित'
कैप्टन स्मित के माध्यम से कुछ ऐसा घटा है जिस पर भारत ही नहीं बल्कि मानवता गर्व कर रही है। जाको राखे साइयां मार सके ना कोय कहावत का अर्थ जानने के लिए विस्मित करने वाली स्मित की घटना से बेहतर उदाहरण ढूंढना मुश्किल है। वक्त और आस्था के धनी स्मित के कारण 174 यात्रियों की जान बच गई। 30 सितंबर 2026 को विमान के को-पायलट ने कॉकपिट में रखे एक्स से कैप्टन स्मित को घायल कर दिया। लहूलुहान कैप्टन ने ओमानी को-पायलट के इरादे को भांपते हुए इमरजेंसी मैसेज भेज दिया और तेजी से नीचे जाते विमान को क्रैश होने से बचाने के लिए संकटमोचक हनुमान को याद करते रहे। आस्था से अचानक वह शक्ति मिली कि उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया।
दरवाजे के बाहर से विमान को नियंत्रित करने वाली तथा हमलावर को पकड़ने वाली सहायता इतनी तेजी से उपलब्ध हुई कि सहज विश्वास नहीं होता। एक व्यक्ति ने नीचे की ओर जाते हुए विमान का रुख ऊपर की ओर मोड़ दिया और दूसरे लोगों ने हमलावर को वश में कर लिया; इतना बेहतर समन्वय तो बरसों के प्रशिक्षण के बाद भी घटित होना मुश्किल होता है। लेकिन यह असंभव संभव हुआ है।
संकट के जिस नाजुक क्षण में स्वस्थ व्यक्ति की भी इंद्रियां काम करना बंद कर देती हैं, उसी संकट के क्षण में हनुमान चालीसा के पाठ से जन्मी आंतरिक शक्ति ने घायल अवस्था में लेटे हुए कैप्टन को कॉकपिट का दरवाजा खोलने की शक्ति दे दी। सबसे गहरे अंधेरे क्षण में भी जब आंखों को आशा का सूरज दिखने लगे तो उसका नाम आस्था है-
'मैं पाबगिल हूं पर सितारों की बात करता हूं
खिजांजदां हूं पर बहारों की बात करता हूं
दबी हुई है जहां सोज आग सीने में
मैं राख हूं पर शरारों की बात करता हूं
दुआ करो मुझे ताबे दीद मिल जाए
मैं बेबसर हूं पर नजारों की बात करता हूं।'
कैप्टन स्मित के विमान में जो दुर्लभ-सुखद संयोग घटित हुआ है, उसको और अच्छी प्रकार से समझने के लिए पृष्ठभूमि में 12 जून 2025 को घटी अहमदाबाद प्लेन क्रैश को थोड़ा याद करते हैं। विमान उड़ा ही था कि दोनों इंजनों को फ्यूल मिलना बंद हो गया। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से पता चला कि एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि फ्यूल स्विच क्यों बंद किया तो उसका जवाब था कि मैंने बंद नहीं किया।फ्यूल स्विच के बंद होने से इतनी बड़ी दुर्घटना उड़ान भरते ही घट गई कि दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बांसवाड़ा के एक पिता ने तो अपने बेटे बहू के साथ तीन पोते पोतियों को खो दिया। विमान में सवार एक को छोड़कर सभी यात्री तो जल कर मरे ही साथ ही विमान डॉक्टर-मेस पर गिर गया जिससे दुर्घटना आत्यंतिक रूप से हृदय विदारक हो गई।
वक्त वक्त की बात है। एयर इंडिया विमान में सवार यात्रियों का वक्त इतना प्रतिकूल था कि छोटी सी तकनीकी खराबी के कारण इतनी बड़ी दुर्घटना घट गई, दूसरी तरफ स्मित का वक्त इतना अनुकूल था और आस्था की शक्ति इतनी प्रबल हुई कि विमान को हाईजैक करने वाले के मंसूबे पर पानी फिर गया। 34000 फीट की ऊंचाई से 1 मिनट में 17000 फीट नीचे जाने वाले विमान में घायल कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा भी खोल दिया और ईश्वर के दृश्य हाथ ने विमान का रुख भी मोड़ दिया तथा हमलावर को दबोच भी लिया।
यह घटना व्यक्तिगत साहस, संकल्प के साथ संकटमोचक के प्रति आस्था के एक सुखद संजोग के रूप में सदैव याद किया जाएगा। व्यक्ति की शक्ति की एक सीमा होती है, वह सीमा परमशक्ति के प्रति आस्था से असीम हो जाती है। फिर ऐसा लगने लगता है कि इस घटना में दृश्य हाथ से ज्यादा अदृश्य शक्ति काम कर रही थी-
"जब निगाहों में सिमट जाते अंधेरे
जिंदगी बिखरे समय के खा थपेड़े
कौन धुंधलाई हुई परछाइयों में
जिंदगी के कण तमाम समेट लेता।
जो जमाने से विभाजित हो न पाई
रह गई अवशेष वह जीवन इकाई
कौन फिर संजोग बन तन्हाइयों में
जिंदगी को नित नये आयाम देता।"
बिखरती हुई जिंदगी को समेटने वाला और जिंदगी को नित नए आयाम देने वाला संकटमोचक कोई है जिसे सिर्फ आस्था की आंख ही देख सकती है। संकट के समय में उसके प्रति समर्पण से व्यक्ति को इतना साहस और ऐसा संकल्प प्राप्त हो जाता है कि असंभव भी संभव हो जाता है।
🙏Salute to Hero Smit🙏
'शिष्य-गुरु संवाद' से प्रो.सर्वजीत दुबे🙏🌹